टीबी मुक्त भारत: छत्तीसगढ़ के इस जिले की 182 पंचायतें हुईं टीबी मुक्त, 878 मरीजों को मिला उपचार
प्रशासनिक रिपोर्टर|बलौदा बाजार
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी मुक्त पंचायत अभियान और 100 दिन निश्चय निरामय अभियान के तहत तेजी से काम किया जा रहा है। इसमें उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। अब तक 878 नए टीबी मरीज जहां चिन्हित हुए हैं, जिनका परीक्षण, पुष्टि और उपचार निःशुल्क किया जा रहा है। वहीं 182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की गई हैं।
निः क्षय मित्र ने मरीजों को दिया पोषण आहार।
कलेक्टर दीपक सोनी के नेतृत्व में बलौदा बाजार में टीबी मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 1 जनवरी से 10 अक्टूबर 2025 तक दर्ज मरीजों में बलौदा बाजार में 256, भाटापारा में 189, कसडोल में 160, पलारी में 150 और सिमगा में 123 मरीज चिन्हित हुए हैं। वहीं टीबी मरीजों के पोषण के लिए “निःक्षय मित्र” पहल के तहत मरीजों को फली दाना, सोयाबीन बड़ी, तेल और गुड़ जैसे पोषण आहार का वितरण किया गया। जिले के 878 मरीजों को इस योजना का लाभ मिला है। बलौदा बाजार जिले में निःक्षय मित्र की भूमिका जिले के समाजसेवी निभा रहे हैं, जिनके द्वारा जिले के सभी टीबी मरीजों को एक माह के लिए 1 किलो मूंगफली दाना, एक लीटर तेल, एक किलो सोयाबीन बड़ी, एक किलो गुड का पोषण पैकेट तैयार कर स्वास्थ्य विभाग को दिया जा रहा है। इन टीबी मरीजों को पोषण आहार के रूप में दान देकर सामाजिक भूमिका निभा रहे हैं। अभियान के तहत अब तक जिले की 182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। इनमें सिमगा के 45, कसडोल के 44, पलारी के 31, भाटापारा के 34 और बलौदा बाजार के 28 पंचायतें शामिल हैं। पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोषण आहार वितरण के समय डॉक्टर पंकज वर्मा, डॉ श्रद्धा कानकिया, पीआर मारकंडे, सुरेंद्र कुमार यादव, प्रमोद कुमार तिवारी, एकता ध्रुव आदि मौजूद रहे।
विशेष बात यह है कि बलौदा बाजार जिले के 10 पंचायत ऐसे हैं जहां पिछले दो वर्षों से एक भी टीबी मरीज नहीं मिले हैं। इनमें भाटापारा विकासखंड के देवरानी और गोढ़ी टी पंचायत और सिमगा विकासखंड के दुलदुला, केसली, नेवधा, पौंसरी, बछेरा, बिश्रामपुर, हरिनभट्ठा और टेकारी पंचायत शामिल हैं। इधर स्वास्थ्य विभाग ने आगामी महीनों में सभी पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है।
टीबी के फैलने और उसकी मुक्ति के लिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
पूर्व सीएमएचओ रहे पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक डॉ. केआर सोनवानी ने कहा कि डॉट कार्यक्रम के तहत टीबी के मरीजों के लिए हाई प्रोटीन डाइट पॉइंट किए हैं जिसमें मूंगफली, सोयाबीन बड़ी, ऑयल और गुड़ दिया जा रहा है जिससे मरीजों को हाई प्रोटीन डाइट से एनर्जी मिले। क्योंकि यह बीमारी लोअर इम्यूनिटी से होती है, वह दब जाए। उन्होंने आगे कहा कि टीबी मुक्ति के लिए काम हो रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ प्रदेश में एजुकेशन की कमी के कारण और गांव में जो मरीज हैं उनकी दवा जो 6 से 8 माह तक चलती है को एक माह खाकर राहत मिलने पर सोचते हैं कि उनका डॉक्टर जबरदस्ती दवा खिला रहे हैं तो वे दवा खाना छोड़ देते हैं। ऐसे ही मरीज साल दो साल बाद मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) बन जाते हैं। क्योंकि बैक्टीरिया को खत्म होने के लिए 6 से 8 माह का समय लगता है। ऐसे समय में गांव के मजदूर और ग्रामीण काम को प्राथमिकता देते हैं, इस बात को ध्यान में रखकर सरकार अब पोषण आहार और आर्थिक मदद के लिए राशि दे रही है। टीबी को समाप्त किया जा सकता है अगर पंचायत और मोहल्ला स्तर पर टीबी मरीजों को ईलाज के लिए मोटिवेट किया जाए, उनकी काउंसिलिंग की जाए।
मैं पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूँ और वर्तमान में Unfearnews में संपादक (Editor) के रूप में कार्यरत हूँ। पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और उसे निष्पक्ष व प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करने का मेरा विशेष अनुभव है। मैंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से 2012-14 में गोल्ड मेडल के साथ पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है। इसके बाद ETV, News18, Dainik Bhaskar, NDTV, AajTak जैसी देश की प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं के साथ काम किया है। हमारा विजन: स्वतंत्र, निष्पक्ष और शोध-आधारित पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सशक्त बनाना और जनता तक सत्य, निष्पक्ष एवं गहन विश्लेषण के साथ समाचार पहुंचाना। 📩 संपर्क करें: ✉️[deependrashukla501@gmail.com] 🌐 [unfearnews.com] [LinkedIn https://www.linkedin.com/in/deependra-kumar-shukla-12532689?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app] 📞 [9109341789]